Khai, Durgandh aur ChaiwalaAuthor: Dr. Gurcharan Singh

  • ISBN 13 : 9789389389111
  • Edition : First
  • Format : HardCover
  • PRICE : ₹ 495

BOOK DESCRIPTION

उसके घर पहुंचा तो चारों ओर सन्नाटा था। दरवाजे को हाथ लगाया तो खुल गया। आलोक सोफे पर उकड़ू, उदास, हताश बैठा था। पेंटिंग से कपड़ा हटाया तो अवाक रह गया। इतनी सुंदर पेंटिंग पर पेंटिंग के दाएं कोने में आलोक के हस्ताक्षर नहीं थे। पेंटिंग में कोई कमी रह गई होगी। पर मुझे कोई कमी नजर नहीं आ रही थी। आलोक ने बताया कि विवेक का कहना है कि पेंटिंग की खाई से दुर्गंध आ रही है, उसे दूर करना होगा। मुझे दुर्गंध को जानना होगा। घटनाओं की सही समझ ही दुर्गंध को दूर कर सकती हैं। पूछताछ करने पर पता चला कि कोई उल्का पिंड गिरा था जिसमें वह खाई बनीं। खाई में एक बार एक कुत्ता गिरा एक बार एक बैल गिरा था। एक बार यात्रियों से भरी एक बस खाई में गिर गई थी । पेंटिंग में खाई को छोड़कर बाकी दृश्य यथार्थ था। वास्तविक खाई में कोई सौंदर्य नहीं था, पर पेंटिंग की खाई मुख्य आकर्षण थी। हमने खाई के अंदर झांका। अंधेरा था। मैंने गहरी सांस ली पर कोई दुर्गंध नहीं थी। खाई , दुर्गंध और चायवाला प्लेसमेंट को लेकर सभी छात्र चिंतित और तनावग्रस्त थे । मंदी के कारण बहुत कम कंपनीया आ रही थी। कुछ छात्रों ने बैंक से लोन ले रखा था तो कुछ छात्रों के माता-पिता ने अपनी सारी जमा पूंजी लगा रखी थी। ऐसे संस्थानों की पढ़ाई बहुत महंगी होती है। छात्र जानते थे कि परीक्षा में अच्छे अंक लाना और साक्षात्कार का सामना करना दोनों अलग है...

AUTHOR DETAILS

Dr. Gurcharan Singh
उपन्यास, कहानी, नाटक, कविता, बाल साहित्य, आलोचना, साक्षात्कार, संपादन, अनुवाद कोष, निर्माण आदि कई विधाओं में लेखन के लिए। सुविख्यात डॉ. गुरचरण सिंह का जन्म 7 जून,( 1943), को सानौदा (सागर, मध्यप्रदेश ) में हुआ। अंग्रेजी और हिंदी में एम.ए. करने के उपरांत दिल्ली विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. की। उन्हें यू.जी.सी. की सीनियर रिसर्च फैलोशिप भी मिली। अपने पहले उपन्यास यात्रा (1983), के साथ ही उपन्यासकार के रूप में उनकी पहचान बनी। अपने उपन्यासों में डूब जाती है नदी (1985),अपना अपना सच (1889), नाग पर्व (1991. 2005), की हिंदी कथा साहित्य में अपनी नई संवेदना, विचार, प्रश्नकुलता एवं नए विषयों को प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है । सम्प्रति - श्री गुरुनानक देव खालसा महाविद्यालय ( दिल्ली विश्वविद्यालय) के हिन्दी विभाग से उपाचार्य पद से सेवानिवृत्त।पता - 6/15, अशोक नगर, दिल्ली- 110018

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