Meri Geet YatraAuthor: Ram Darshan Misra

  • ISBN 13 : 9789389389074
  • Edition : First
  • Format : HardCover
  • PRICE : ₹ 595

BOOK DESCRIPTION

मेरी गीत- यात्रा मेरे समग्र गीतों का संकलन है। मैं अपनी काव्य- यात्रा के प्रारंभ में मुख्यत: गीतकार था। इस संकलन के प्रारंभिक यानी सन् 1945 और 1951 के बीच के गीत मेरे प्रथम काव्य - संग्रह पथ के गीत में संग्रहित हैं। इस संकलन में पथ के गीत के वे गीत नहीं लिए गए हैं जो अधिक रूमानी से हैं। मुझे प्रिय है तो भी। सन् 1962 में मेरा दूसरा काव्य संग्रह 'बैरंग बेनाम चिट्टियां' नाम से आया। इस संग्रह के गीत सादगी और ताजगी के लिए हुए हैं। यानी मेरे गीतों में समयानुकूल बदलाव दिखाई पड़ने लगा था। 1969 में प्रकाशित पक गई है धूप तक मुक्त छंद के साथ गीत भी प्रचुर संख्या में चलते रहे। उसके बाद गीतों की संख्या घटती गई। वे कभी-कभार संग्रह में आ जाते रहे किंतु उन से मेरा लगाव नहीं छूटा। यही वजह है कि 2010 में प्रकाशित काव्य- संग्रह कभी-कभी इन दिनों में वे काफी संख्या में उपस्थित हो गए हैं। उसके बाद के संग्रहों में भी उनकी आहट बनी हुई है। लेकिन सच यही है कि मेरी परवर्ती काव्य- यात्रा मुक्त छ्न्दमयी होती गई और अब मेरा केंद्रीय लगाव उसी से हैं।

AUTHOR DETAILS

Ram Darshan Misra
साहित्य की हर विधा में पुरजोर लेखन करने वाले रामदरश मिश्र अत्यंत सशक्त गीतकार भी है। मेरी गीत यात्रा सन् 45 से लेकर सन् 2012 तक लिखे गए उनके गीतों का संकलन है। मिश्र जी समय के साथ चलने वाले सर्जक है अतः उनके गीतों में समय के साथ बदलाव आता गया है। उनके गीत निरंतर सादे और अर्थ- सघन होते गए हैं। उनके गीतों के प्रवाह और दिशा में जीवन का उतार-चढ़ाव प्रतिध्वनित होता गया है। संबंधों की बुनावट धीरे-धीरे सघन और महीन होती चली गई हैं। मिश्र जी गांव की मिट्टी से प्रकृति और लोक उत्सव से बहुत गहरे जुड़े हुए हैं और इसलिए उनके गीत भी महानगर में शून्य होती संवेदना, संवाद- हीनता और भागमभाग का चित्रण भी परिवर्ती गीतों में हुआ है। कई गीतों में शहर का बेगानापन और अजनबीपन का खौफ बहुत खूबसूरती से रुपायित हुआ है। मिश्र जी दृष्टि- संपन्न कवि तो है ही अनुभव सघनता के भी कवि हैं। गांव से लेकर शहरों तक का उन्होंने जो सम- विषम जीवन यात्राएं की है उनकी व्यापक और सघन अनुभूतियां उनके भीतर उतरती रही हैं और वें उनके गीतों और अन्य काव्य- शैलियों की रचनाओं में आकार पाती गई है। उनका पूंजीभूत स्वरूप तो उनके उपन्यासों में दिखाई पड़ता है। सहजता और पारदर्शिता के नाते इनके अत्यंत भाव- सघन गीत भी संप्रेष्य होते हैं। आसपास के जीवन- जगत से लिए गयें बिंबो और प्रतीकों में व्याप्त विचार और भाव छवियों में पाठकों को अपनी छवियां दिखाई पड़ने लगती है।

Trending Now

  • Stri Ke Haq Me Kabir
  • Apaar Sambhanaao Ka Vismaykaree Sahitykaar
  • Mahila Katha Sahitya : Asmita Ka Sawal
  • Uttar - Madhyakalin Kaviyitriya Aur Unka Kavya Chintan
  • Hindi Cinema me Sahityik Vimarsh
  • Meri Janib Ishq
  • Amritasya Narmada
  • Saath Saath Mera Saaya (dairy samagra vol-1)

New Releases

  • Stri Ke Haq Me Kabir
  • Hindi Cinema me Sahityik Vimarsh
  • Meri Janib Ishq
  • Amritasya Narmada

FortheComing Books

  • Art of communication
  • Banjar Hoti Sanskriti