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संपादकीय
प्दिदठिि पदत्का ‘दनगम आलोक- 2025’ का यह नवरीन अंक आप सभरी सुिरी पाठकों के समक्ष प्सिुि करिे
हुए मुझे अतयंि हष्म और गौरव की अनुभूदि हो रहरी है। यह पदत्का मात् एक संकलन नहीं, बदलक दिललरी नगर दनगम
के पररवार की वैचाररक जरीवंििा और राजभाषा दहंिरी के प्दि हमाररी अटूट दनठिा का जरीवंि प्दिदबंब है।
दवगि वष्म हमने िेखा दक दकस प्कार हमारे अदिकाररयों और कम्मचाररयों ने अपनरी वयसि काय्मशैलरी के बरीच
से समय दनकालकर सादहतय सृजन में रुदच दिखाई। 671 से अदिक सादथयों की सदक्रय भागरीिाररी ने जो कीदि्ममान
सथादपि दकया था, वह इस वष्म और भरी अदिक सुदृढ़ हुआ है। इस अंक में सदममदलि कदविाएं, संसमरण और लेख
न के वल लेखकीय क्षमिा को िशा्मिे हैं, बदलक यह भरी दसद्ध करिे हैं दक दनगम के रचनाकार समाज और वयवसथा
के प्दि दकिने सजग हैं।
राजभाषा दवभाग का सिैव यह प्यास रहा है दक दहंिरी के वल पत्ाचार की भाषा न रहकर हमारे भावों और
अदभवयदक्त की मुखय भाषा बने। काय्मशालाओं और प्दियोदगिाओं के माधयम से जो उतसाह आप सभरी ने दिखाया
है, वह प्शंसनरीय है। मुझे पूण्म दवश्ास है दक यह अंक सूचनातमक होने के साथ-साथ आपके हृिय को भरी सपश्म करेगा।
अंि में, मैं उन सभरी रचनाकारों का आभार वयक्त करिा हूँ दजन्होंने अपनरी लेखनरी से इस अंक को समृद्ध दकया
है। पाठकों से दनवेिन है दक वे पदत्का को और अदिक बेहिर बनाने हेिु अपने बहुमूलय सुझाव और प्दिदक्रयाएं
साझा करिे रहें। आपके परामश्म हरी हमाररी प्गदि का माग्म प्शसि करेंगे।
आशा है दक ‘दनगम आलोक’ का यह सफर दनरंिर जाररी रहेगा।
शुभकामनाओं सदहि।
अवनतर नारारण वमश्
सहायक अनुभाग अदिकाररी (भाषा)
दिललरी नगर दनगम
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