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प्रकृ हि की िै                                        हिंददी  भारा



                      लदीला नयािदी                                दहंिरी हमाररी राजभाषा है। वैसे िो भारि में अनेकों

                                                              प्कार की भाषा बोलरी जािरी है, लेदकन दहंिरी  भाषा हमाररी
          प्कृदि की है लरीला न्याररी,                         लोकदप्य भाषा है। 14 दसिमबर 1949 को दहंिरी  भाषा

          प्कृदि हमें है जान से पयाररी।                       को संदविान में अंगरीकृि दकया गया था, इसदलए प्तयेक
                               प्कृदि िेिरी है हररयालरी,      वष्म 14 दसिमबर को दहंिरी  दिवस के  रूप में मनाया जािा

                               जरीवन में भरिरी खुशहालरी।      है। दहंिरी  बहुि हरी सरल भाषा है जो बोलने व समझने में

          प्कृदि है अनमोल उपहार,                              बहुि हरी आसान हैं गाँवों में रहने वाले दहंिरी  भाषा का हरी
          प्कृदि से है हमे सरोकार।                            प्योग करिे है। हमाररी राजिानरी दिललरी में भारि के  सभरी

                               सूरज उगिा सुबह दखलिरी,         राजयों के  लोग आकर दनवास करिे है और अदिकिर

                               साफ़ हवा हमें है दमलिरी।        काया्मलयों में दहंिरी भाषा की जगह अंग्रेजरी भाषा का
          ठंडरी हवा के  मिमसि झोंके ,                         प्योग दकया जािा है। काया्मलय के  सभरी काय्म अंग्रेजरी में

          अनायास हरी हमको रोके ।                              दकए जािे है दजससे अदिकिर लोगों की समझ में नहीं

                               प्कृदि िेिरी सिदी-गमदी,        आ पािा है और वे अपनरी समसया को ठरीक से दलख कर
                               प्कृदि िेिरी दमट्री को नरमरी।  नहरी बिा पािे हैं।

          प्कृदि है अनमोल िरोहर,                                  क ु ् लोग दहंिरी  में काय्म करने में शम्म महसूस करिे

          रखना है हमें इसे संजोकर।                            है। अगर हम सभरी काया्मलय में काय्म दहंिरी  भाषा में करे
                               प्कृदि की है अनुपम मदहमा,      िो दहंिरी भाषा पूररी िरह से प्चदलि हो जायेगरी। आज

                               सबसे ऊपर इसकी गररमा।           के  इस युग में क ु ् लोग समझिे हैं दक हमारे बचचे अगर

          शांदि का संिेश सुनाए,                               अंग्रेजरी वाले सक ू ल में पढेंगें िो उन्हें अंग्रेजरी भाषा आ
          भरीनरी-भरीनरी खुशबू आए।                             जायेगरी और इस िरह से बचचों को दहंिरी  भाषा का ज्ान

                               प्कृदि से दमलिे हैं उपहार,     नहीं दमल पािा है । हम सब अपनरी हरी भाषा को परी्े की
                                                              ओर िके लिे नज़र आ रहे है। अगर ऐसे हरी चलिा रहा
                               हमें भरी रखना है उर्म वयवहार।  िो हम अपनरी मािृ भाषा को हमेशा के  दलए लुप् कर िेगें।
          प्कृदि की है लरीला न्याररी,

          प्कृदि हमें है जान से पयाररी।                           इसदलए हमें ये प्ण लेना चादहए दक हम सभरी काय्म
                                                              दहंिरी  भाषा में हरी करें, दहंिरी  भाषा में हरी बािें करें, दजससे

                                                              की हमाररी भाषा हमेशा जरीदवि रहें।
                               पंकज (प्रा्वमक अधरापक)

                दवद्ालय :- दनगम प्ाथदमक सहदशक्षा दवद्ालय                                          राहु् वनवा्ष्
                                           नयरी बसिरी दिललरी                                  डाटा-एंट्री-आॅपरेटर

                                                                           के न्द्ररीय लाइसेन्स एवं प्वि्मन कक्ष दवभाग

                                                                            fuxe vkyksd ¼o"kZ&2025½        23
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