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माँ






              आज िक कोई भरी महान से महान कदव या सादहतयकार भरी माँ श्ि की मदहमा की सटरीक वयाखया नहीं कर
          पाया है। माँ के  दवषय में अपनरी लेखनरी से के वलमात् अपने अनुभवों को कलमबद्ध कर रहा हूँ। माँ' श्ि के वल एक

          संबोिन नहीं, बदलक समप्मण, तयाग, िपसया, करुणा और अनंि प्ेम का सजरीव प्िरीक है। 'माँ हरी िो जरीवन की प्थम
          पाठशाला, प्थम गुरु एवं प्थम आश्य होिरी है। माँ ने मुझे न के वल अंगुलरी पकड़कर चलना दसखाया, बदलक जरीवन

          की कदठन एवं चुनौिरीपूण्म राहों पर संिुलन और साहस के  साथ आगे बढ़ना भरी दसखाया।

              वे औपचाररक दशक्षा से भले हरी वंदचि रहीं, पर जरीवन के  दजन अमूलय पाठों को उन्होंने अपने आचरण,

          िैय्म और संघष्म से दसखाया, वे आज भरी मेरे जरीवन की दिशा दनिा्मररि कर रहे हैं। कदठन समय में संयम रखना,
          पररदसथदियों से हार न मानना, सफलिा दमलने पर दवनम्र रहना और असफलिा आने पर दनराशा में डूब न जाना, ये

          सभरी मूलय 'माँ' की अनौपचाररक दशक्षा का हरी पररणाम हैं।

              आज भरी समृदियों में वह दृशय सजरीव है। हम सब भाई-बहनों को भरपेट िूि दपलाकर सवयं एक कटोररी हाथ में

          लेकर िूि परीने का अदभनय करना। खेि हो या घर, हर काय्म में हमसे अदिक श्म करना, आदथ्मक अभावों के  बावजूि
          हमाररी पढ़ाई में कभरी बािा न आने िेना, गलिरी करने पर डाँटना और दफर अपने ममिामयरी आँचल में समेट लेना,
          और भरी न जाने दकिनरी हरी घटनाएँ समृदिपटल पर अनायास हरी िैर जािरी हैं। उनका सपना के वल हमें पढ़ा-दलखा

          बनाना नहीं था, बदलक संवेिनशरील, संसकाररी और समाजोपयोगरी नागररक गढ़ना था।

              मकर संक्रांदि के  पावन पव्म पर, वष्म 1999 में, 'माँ ने अपनरी सांसाररक यात्ा पूण्म कर परमिाम की ओर प्सथान

          दकया। उसरी वष्म 1 जुलाई, 1999 को मुझे दिललरी नगर दनगम में अधयापक के  पि पर दनयुदक्त दमलरी। यह संयोग नहीं,
          बदलक 'माँ' के  संसकारों और आशरीवा्मि का साक्षाि् प्माण प्िरीि होिा है।


              आज गव्म से कहा जा सकिा है दक माँ द्ारा दिखाए गए माग्म पर चलिे हुए उनके  पुत् का नाम बड़े हरी सममान के
          साथ दिललरी के  सव्मश्ेठि अधयापकों में दलया जािा है। मेरे दवद्ादथ्मयों ने सफलिा का चरम प्दिमान सथादपि दकया है।

          अनेकों दवद्ाथदी उचच दशक्षा प्ाप् कर आज समाज के  दवदभन्न क्षेत्ों में सफलिा की सरीदढ़याँ चढ़िे हुए राषट् दनमा्मण
          में अपना सदक्रय योगिान िे रहे हैं। वष्म 2020 में दशक्षक दिवस' के  अवसर पर महामदहम राषट्पदि द्ारा प्िर् 'राषट्रीय

          दशक्षक पुरसकार' मेरे दलए वयदक्तगि उपलद्ि से कहीं अदिक, माँ के  तयाग, श्म और सािना का प्दिफल है। यदि
          इस अवसर पर 'माँ' साकार रूप में होिीं, िो इस क्षण का आनंि दनचिय हरी अिुलनरीय होिा; परंिु उनका अदृशय

          माग्मिश्मन और आतमरीय उपदसथदि आज भरी हर किम पर मेरा संबल बनरी हुई है।





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