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मंििे से कया मांिना



              एक बार एक बािशाह घोड़े पर सवार होकर अपने राजय के  ग्रामरीण इलाके  में घूम रहा था। जैसे हरी वह घने जंगल

          में पहुँचा, चारों ओर अंिकार ्ा गया और दफर िेज बाररश होने लगरी। बािशाह जलिरी से मुड़ा और अपने महल की
          ओर वापस लौटने लगा। िभरी झाड़री में से एक दहरन क ू ि कर सामने आ गया और घोड़ा डर गया। अचानक घोड़े ने

          उ्ाल भररी और बािशाह दगर गया। उसे जंगल में बेहोशरी की हालि में ्ोड़कर घोड़ा िौड़ने लगा। जब बािशाह को
          होश आया, चारों ओर अंिेरा था और उसकी टांग बुररी िरह जखमरी हो गई थरी। जखमरी हालि में भरीगे हुए कीचड़ से
          लिपथ बािशाह ने अपनरी साररी िाकि जुटाई और पेड़ के  टहनरी को अपनरी ्ड़री बनाकर महल की ओर चल पड़ा।


              कई घंटे बाि उसे पिा चला दक वह रासिा भटक गया है, लेदकन वह चलिा रहा और आदखर में एक झोपड़री
          के  पास पहुँच गया, जहां उसे दखड़की से एक ्ोटा-सा िरीपक जलिा नजर आया। उसने िरवाजा खटकाया और एक
          सरीिे-सािे दकसान ने उसका सवागि दकया, उसकी हालि िेखकर वह िुरंि उसे झोपड़री के  अंिर ले गया दकसान ने

          उसे एक आम मुसादफर समझा। वह उसके  दलए भोजन और पानरी लाया। उसके  जखमों पर मरहम लगाया और बिलने
          के  दलए कपड़े दिए और उनसे राि भर वहीं आराम करके  अगले दिन सफर जाररी रखने को कहा। अगलरी सुबह जागने

          पर बािशाह उस उिार और प्ेमरी दकसान के  प्दि शुक्रगुजार था। भले आिमरी, मैं इस िेश का बािशाह हूँ। यह मेररी
          अंगूठरी है। जो मेहरबानरी िुमने मेरे ऊपर की उसके  दलए मैं हमेशा िुमहारा एहसानमंि रहूँगा। अगर िुमहें कभरी भरी मिि
          की जरूरि पड़े िो मेरे महल में जरूर आना और यह अंगूठरी दिखाना। मेरे पहरेिार िुमहें सरीिा मेरे पास ले आएंगे। मैं

          िुमहाररी जो भरी मिि कर सका, जरूर करू ं गा।

              क ु ् समय बरीिने पर दकसान के  सामने एक समसया आ गई और उसने सोचा दक बािशाह इस मुदशकल में उसकी
          मिि कर सकिा है। इसदलए उसने बािशाह के  महल जाकर बािशाह से मुलाकाि करने का फैसला दकया। वाकई

          पहरेिार अंगूठरी को िेखकर उसे िुरंि राजा के  कक्ष में ले गए। उन्होंने दकसान को चुपचाप इंिजार  करने के  दलए कहा
          कयोंदक बािशाह इबािि कर रहा था। दकसान ने महान बािशाह को िोनों हाथ उठाकर खुिा से िुआ मांगिे हुए सुना।
          जब बािशाह इबािि के  बाि उठा िब उसने दकसान को िेखा। उसका सवागि करिे हुए बािशाह ने पू्ा दक कया

          वह उसके  दलए क ु ् कर सकिा है?

              दकसान ने बड़री नम्रिा से कहा बािशाह सलामि आप कया मुझे बिाएंगे दक आप कया कर रहे थे?  कयों नहीं!
          मैं खुिा से अपनरी समसयाओं को सुलझाने के  दलए मिि मांग रहा था और अपने िेश में शांदि बनाए रखने के  दलए

          उससे सहायिा मांग रहा था। बहुि-बहुि शुदक्रया, बािशाह सलामि। कया अब मुझे जाने की इजाजि है? कयों, कया
          हुआ? कया िुम मेरे पास मिि मांगने के  दलए नहीं आए थे? बािशाह सलामि,  मैं भरी उसरी के  िर से मिि मांगूंगा,
          दजसके  िर से आप मांग रहे थे। बेशक आप बािशाहों के  बािशाह हैं, लेदकन मैं जान गया दक हम सभरी मादलक के

          िर के  दभखाररी हैं। इसदलए मैं भरी उसरी से मिि मांग लूंगा।

                                                                                              सुश्ली मलीना क ु मारली
                                                                                             डाटा-एन्ट्री-ऑपरेटर

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