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िमािदी प्राकृ हिक संपदा औि शान िै अिावलदी





              िुदनया की सबसे प्ाचरीन पव्मि श्ृंखला है अरावलरी।।

              70 करोड़ वष्म पूव्म िो महाद्रीपों के  टकराने से पृ्थवरी की परिें ऊपर उठरी िो उठ खड़री ये अरावलरी।।

              सुंिर टरीलों और पव्मि श्ृंखलाओं से  है ये सजरी।
              भारि के  िदक्षण पदचिम से उर्र पूव्म दिशा में है फैलरी

              दकिनरी झरीले दकिनरी नदियां बनास, लूणरी, बेराच, साबरमिरी इसमें समा रहरी।।

              जरीवन वृक्ष खेजड़री को माथे पर ये सजा रहरी।
              ये खेिों की मखमलरी चािर है बनरी हरे भरे लरजिे शमदीले जंगल से सजरी।

              वन्यजरीवों का आश्य बनरी सुंिर खग का अंबर है बनरी।।

              है बलशालरी दहममिवालरी रेदगसिान को रोकने वालरी।
              भूजल को संदचि करने वालरी मौसम को संिुदलि रखने वालरी।

              जल जंगल जरीवन की है ये रक्षावलरी।।

              गुजराि पालनपुर से शुरू होकर हररयाणा, राजसथान दिलवाडे मंदिर को ये सजा रहरी।
              दिललरी रायसरीना दहलस पर इठला रहरी।

              पानरी हवा िरिरी की ढाल है ये बनरी थार मरुसथल को थामे है खड़री।।

              जलवायु को दनयंदत्ि करने वालरी।
              हमाररी प्ाकृदिक संपिा और शान है अरावलरी।।




              उषा की ये कलम कहे मि हाथ लगा मानव इसको वरना प्लय आ जाएगरी।
              इस अरावलरी के  हटने से उस गम्म रेि के  िांडव से

              सरीना िान जो खड़ा दहमालय उसकी बफदीलरी श्ेि चािर दपघल जाएगरी।

              गंगा जमुना में बाढ़ की त्ादह त्ादह मच जाएगरी।।



              निमसिक हो जा िू इसके

              जल जंगल जरीवन की है ये रक्षावलरी
              ये अरावलरी है अरावलरी।।

                                                                                         उरा खत्ली (अधयादपका)
                                                                                         होलंबरी कला दिललरी 82




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