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'माँ' का तयाग सबके  दलए अपररदमि प्ेरणा है, उनकी समृदि हमारा नैदिक िादयतव और उनके  संसकार हमारा

          जरीवन-िश्मन होिे हैं। वासिव में, 'माँ' श्ि की मदहमा श्िों में नहीं, अदपिु हमारे कमयों में प्दिदबंदबि होिरी है। 'माँ'
          की सचचरी सेवा के वल उनके  प्दि कृिज्िा वयक्त करना नहीं, बदलक उनके  संसकारों को समाज में जरीदवि रखना है।

          'माँ' की सेवा िभरी साथ्मक होिरी है, जब हम ज्ान को िरीप बनाकर अज्ान का अंिकार िूर करें, संवेिना को आचरण
          बनाकर समाज के  कमजोर वग्म का हाथ थामें और अपने कि्मवयों को ईमानिाररी से दनभाकर राषट् के  भदवषय को

          सँवारने में अपना सव्मश्ेठि योगिान िें। 'माँ' का जरीवन सवयं एक मौन उपिेश है, जो हमें दसखािा है दक दनसवाथ्म कम्म
          हरी सचचरी सािना है।

                                                                                                     सुरेन्द्र वसंह

                                                                                                       अधयापक

                                                                                                  दसदवल लाइन्स











                 सभदी से प्रेम किो                                सभरी से प्ेम कर इिना खुि से प्ेम है दजिना।

                                                                  जैसा बरीज बोएगा, वैसा फल िू पाएगा।
              सभरी से प्ेम कर इिना, खुि से प्ेम है दजिना।         ज्ान का िुरुपयोग कर ना, चैन पाएगा।

              िेरा िामन ये खुदशयों से, हरिम भर के  रखेंगे।        गलि संगि में पड़कर िू, दमट हरी जाएगा।

              सभरी का मान कर इिना,िू सममान कर इिना।

              सभरी से प्ेम कर इिना,खुि से प्ेम है दजिना।          दशक्षा से आगे बढ़कर, नाम कर अपना।

                                                                  सभरी से प्ेम कर, इिना खुि से प्ेम है दजिना।

              जो आया है सो जाएगा, प्भु से दमल हरी जाएगा।          सभरी से प्ेम कर इिना, खुि से प्ेम है दजिना।

              िेरे कमयों का लेखा िो,वहां पर खुल हरी जाएगा।        िेरा िामन ये खुदशयों से,हरिम भर के  रखेंगे।
              शम्म से दसर ना झक जाए,करले काम क ु ् ऐसा।
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              सभरी से प्ेम कर इिना खुि से प्ेम है दजिना।          सभरी का मान कर इिना, िू सममान कर इिना।


                                                                  सभरी से प्ेम कर इिना, खुि से प्ेम है दजिना।
              िम्म के  नाम पर प्भु को,ना इिना बांट रे बंिे।

              जो ईश्र है वहरी अललाह,िू इिना मान ले बंिे।                                              सररता (अधरावपका)

              ज्ान से जरीवन बचा, ना जान ले बंिे।                                            नरेला क्षेत् ( दशक्षा दवभाग)

              नफरि की िरीवारों को ना उठने िेंगे हम इिना।



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