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हिंददी भारा निीं हिनद का िािा
दहंिरी हैं हम, विन है दहंिुसिान हमारा है
सारे जहाँ से अच्ा दहंिरी में काम हमारा है
माँ को कहिे मोम यहाँ बापू को डेड बनाया है,
बदहन को सरीस और भाई को ब्रो बनाया है
चाचा-चाचरी, िाऊ-िाई, मामा-मामरी सभरी जनों को अंकल ऑन्टरी खूब बनाया है
ररशिों को हरी भूल गए जब अंग्रेजरी में इन्हें पढ़ाया है
दहंिरी के जैसरी कोई भाषा ना, जो बोले है बस वहरी दलखा यहाँ जािा है
भाव, क्रोि, उद्धघोष को जब दहंिरी में बोला जािा है,
बल और जोश बढ़ाया जािा है
और दकसरी भाषा में बोलो जोश नहीं बढ़ पािा है
अंग्रेजरी के श्िो में हरी चककर है,
बोलन में िो एक लगे पर अथ्म सभरी के न्यारे है
िफिर और अफसर की भाषा दहंिरी में ना होिरी है
हम जैसे आम जनों को ठगने की कोदशश रहिरी है
आओ दहंिरी भाषा को हम सब नमन करें
दहंिरी भाषा नहीं दहन्ि का िारा है,
दहंिरी भाषरी होने में गव्म हमारा है
दहंिरी के गानों पर झमे िुदनया साररी है
ू
दफर कयों ना कहूँ सवग्म से सुंिर सपनों से पयाररी दहंिरी भाषा हमाररी है
दहंिरी हैं हम विन है दहंिुसिान हमारा है
सारे जहाँ से अच्ा दहंिरी में काम हमारा है
सुनली् क ु मार
बहुआयामरी कम्मचाररी
िदक्षणरी क्षेत्
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