Page 43 - MCD
P. 43

़
             जदीवन में हवज्ान से                              मां से बढकि इस दहनया में
                                                                                                 ु
                 सबको िै आिाम                                         देव निीं कोई दजा
                                                                                                   ू


                जरीवन के  हर काम में बसा हुआ दवज्ान है            मां से बढ़कर इस िुदनया में िेव नहीं कोई िूजा
                िरिरी, अंबर, सुंिर िारे इनमें भरी दवज्ान है,       पयार प्ेम की मूरि है ये, इसकी कर लो पूजा

               खेल–खेल में बचचे सरीखें यह मेरा दवज्ान है
                जरीवन के  हर काम में बसा हुआ दवज्ान है           नाै महरीने िक गभ्म में रखकर सहिरी बहुि कसाला

                                                                     गरीले में खुि सोिरी है सूखे में हमें सुलाया
           मूढ़मदि िो समझ ना पाए, ज्ानवान को खूब हरी भाये,      मां हरी जाने औलाि की खादिर दकिना िुख उठाया

                           ये सुंिर दवज्ान है                 तयाग, िपसया और बदलिान की दजंिा मूि्म मां का साया
                जरीवन के  हर काम में बसा हुआ दवज्ान है
                                                                  मां से बढ़कर इस िुदनया में िेव नहीं कोई िूजा

                                                                   पयार प्ेम की मूरि है ये, इसकी कर लो पूजा
                 जल, थल, नभ, में बसा हुआ दवज्ान है,

                नए-नए प्योग है करके  भारि बना महान है         भुलाकर अपनरी सुख-सुदविा को सबका िुख ये िूर करे
                जरीवन के  हर काम में बसा हुआ दवज्ान है           खुि िो रहिरी दसंपल सरी और हमको अपटूडेट रखे
                                                                  घर का सारा काम करे, नहीं िदनक दवश्ाम करे

                 िरिरी नरीचे चले मेट्ो, ऊपर वायुयान है,           सबसे पहले जगिरी है और सबसे परी्े सोिरी है
           जरीवन को है सुगम बना िे, जरूरि का नाम दवज्ान है        ना लेिरी यह ्ुट्री और न वेिन की िरकार करे

                जरीवन के  हर काम में बसा हुआ दवज्ान है            मां से बढ़कर इस िुदनया में िेव नहीं कोई िूजा

                                                                   पयार, प्ेम की मूरि है ये, इसकी कर लो पूजा
             अंिकार को िूर भगा िे, िूर बैठकर बाि करा िे,       औलाि के  सुख में खुश रहिरी, करिरी सब न्यो्ावर है
               पटररी ऊपर रेल चला िे, यह अनूठा दवज्ान है           अपनरी इच्ाएं भूल गई, ये होिा मां का पयार है

                जरीवन के  हर काम में बसा हुआ दवज्ान है
                                                                 हम पर पललू रख िेिरी और खुि िूप में चलिरी है


           िेश-दविेश की खबर सुना िे, िूर बैठकर बम दगरा िे,            लक्मरीबाई ने भरी मां का फज्म दनभाया
              िुशमन को घर में हरी मारे, ऐसा महान दवज्ान है        पुत् को बांि परीठ पर दफर रण को जरीि दिखाया
                जरीवन के  हर काम में बसा हुआ दवज्ान है            मां से बढ़कर इस िुदनया में िेव नहीं कोई िूजा

                जरीवन के  हर काम में बसा हुआ दवज्ान है             पयार प्ेम की मूरि है ये, इसकी कर लो पूजा




                                          ईश्वर वसंह मव्क                                          ववषणु क ु मार
                                  सहायक अनुभाग अदिकाररी                                      बहुआयामरी कम्मचाररी

                                                                                                       मुखयालय

                                                                            fuxe vkyksd ¼o"kZ&2025½        43
   38   39   40   41   42   43   44   45   46   47   48