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परिंदे नािदी िू नािायणदी
िुमने िाना पानरी लेकर, मुझ पर है उपकार दकया। नाररी िू नारायणरी करिरी जग का है कलयाण
परमदपिा है िेने वाला मैं िो के वल एक जररया। िेररी शदक्त को सिा पूजे सारा जहान
िुम आिे हो मेररी ्ि पर खुशरी मुझे िे जािे हो। माँ बहन और बेटरी बनकर रखिरी सबका धयान
जरीवन िादयनरी िुझसा ना कोई महान
बिले में बस थोड़ा सा िाना पानरी पािे हो।
पयार प्ेम और तयाग की मूदि्म सब करिे हैं गुणगान
दकिनरी साररी बािें एक पल में िुम दसखला जािे हो।
घर-संसार भरी िुझसे चलिा िदनक नहीं अदभमान
िैय्म, शांदि, एकिा, पररश्म का िुम पाठ पढ़ािे हो। दवपिा आए अगर कभरी िो, िू िुगा्म बन जािरी
दभन्न आकृदि, दभन्न प्जादि दफर भरी एक समान हो। दमल जुलकर जो रहें सभरी िो, िनवषा्म कर जािरी
कभरी ना लड़िे, प्ेम से रहिे ईश्र की संिान हो। िेवों ने भरी पूजा िुझको, िेिरी सबको है वरिान
दजिना भरी हो, दमलजुल कर संिोष से िुम वह खािे हो। सवग्म से सुंिर, सपनों से पयारा, सवरूप िेरा महान
बेटरी बनकर सबको हरी िुम भािरी हो
कभरी ना लड़िे िुमको िेखा, ना उतपाि मचािे हो।
बहन बनकर भाई की रक्षा करिरी हो
मेहनि और संिोष िुमहाररी, बहुि बड़री ये खूबरी है।
कभरी प्ेयसरी, कभरी प्ेदमका और पतनरी बन जािरी हो
वि्ममान में वरना िुदनया दसफ्म सवाथ्म में डूबरी है। माँ का रूप जब िारण करिरी, िुख बड़े सह जािरी हो
दसफ्म जरुरि दजिना लेिे जरीने को जो है पया्मप् । अंि समय में आकर भरी, िुम सबकी ढाल बन जािरी हो
ना कोई संग्रह, ना कोई झगड़ा, सब क ु ् ईश्र से है प्ाप्। िािरी, नानरी बन जाए जब बचचों को सरीख दसखािरी हो
आओ हम सब दमलकर, पदक्षयों को िाना पानरी डालें। जग पर हैं उपकार जो िेरे, िुम भरी नहीं दगन पािरी हो
बेजुबान हैं यह पररंिे, दमलकर इनको अपना लें। ्ोटरी-सरी बचचरी से िुम, कया से कया बन जािरी हो
रूप बहुि से िेखे िेरे, सबमें तयाग दिखािरी हो
िुखरी रहे ना कभरी कहीं पर, रखना है सबका धयान
प्रलीवत रमा्ष नर से जयािा नाररी का है, प्भु रखना धयान
अधयादपका, नजफगढ़
नाररी िू नारायणरी करिरी जग का है कलयाण
वरव क ु मार
बहुआयामरी, कम्मचाररी
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