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प्रकृ हि का हवलाप






                    भू पर ढहिे जंगल दवशाल िेख,                           सूखिे क ं काल जैसरी काया िेख,

                      दद्ज के  नरीड़ होिे हलाल िेख।                       पेड़ों में द्परी कै सरी ये माया िेख

                 जानवरों के  दसर पर नाचिा काल िेख,                       फलों को िरसिा हर साया िेख,

                  लुप् होिरी वनसपदियों का जाल िेख।                       अँदियारा चहुँ ओर ्ाया िेख।




                     भागिरी काब्मन की चाल िेख,                         दबन पानरी का सवागि ससुराल िेख,

                      नदियों में आया उ्ाल िेख।                            दबन झले का नदनहाल िेख।
                                                                                 ू
                     िू-िू कर जलिे बुगयाल िेख,                          घड़री-घड़री सूखिा ये पािाल िेख,

                    हादशये पर पहुँचे वृक्ष साल िेख।                   दबन बािल नभ को होिा क ं गाल िेख।




                      पानरी में आया िू उबाल िेख,                       अब अपना जरीना होिा मुहाल िेख,

                     जल से लुप् होिे शैवाल िेख।                      प्कृदि को दमटािरी अपनरी दमसाल िेख।

                  िड़पिे मरीन, कच्प, घदड़याल िेख,                         िूने दकया कया बड़ा कमाल िेख,

                 बे-नरीर िड़पिे प्ाणरी समूह दवशाल िेख।               अब कयों बहािा आँसू जैसे घदड़याल िेख।




                 सबको लरीलने को आिुर अकाल िेख,                           कयों नहीं दकया िूने खयाल िेख,
                      सूरज की बढ़िरी मजाल िेख।                         अपनरी आँखों में ्ाया मलाल िेख।

                     मनुषयों के  खून का उबाल िेख,                    अब िो उठ, संभल, क ु ् कर डाल िेख,

                   िांडव करिरी गमदी का िमाल िेख।                      वरना खो बैठेगा अपना भू-भाल िेख।




                      गैस से चलिा शमशान िेख,                                                             सविन

                   दबन लकड़री के  होिा आह्ान िेख।                                               अधयापक, बवाना

                     गमदी में झलसिे ये मकान िेख,
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                   दबन वृक्षों के  पड़े ये खदलहान िेख।




                                                                            fuxe vkyksd ¼o"kZ&2025½         37
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