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ििज बिस कि कािे बादल








                      गरज बरस कर कारे बािल,                                  गुिगुिाने वाले बिरा,

                         मन हरी मन गुससाए हैं,                                मन में भय जगाए हैं,


                       अब िो मानव जागो िुम,                                 अब िो मानव जागो िुम,

                       प्कृदि का संिेसा लाए हैं।                           प्कृदि का संिेशा लाए हैं।





                       िुम ने कचरा खूब बनाया,                               जलमगन हुई पृ्थवरी साररी,

                        पृ्थवरी पर प्िूषण फैलाया,                           गमगरीन हुए सब नर नाररी,

                        हररी भररी पावन िरिरी ये,                           प्कृदि संग गलि चाल की,


                     क ं क्रीट का जंगल दजसे बनाया।                        अब भुगिेंगे सजा सब भाररी।





                      पलादसटक के  िानव से दमल,                             िोहन रोको िरिरी मां का,

                       जरीवन में ज़हर फैलाए हैं,                             सबको ये समझाए हैं,


                       अब िो मानव जागो िुम,                                 अब िो मानव जागो िुम,

                       प्कृदि का संिेसा लाए हैं।                           प्कृदि का संिेसा लाए हैं।




                       बािलों ने क़हर बरपाया है,

                       मंजर िबाहरी का ्ाया है,                                                    जरोवत जुलका

                       गाँव गलरी सब डूब रहे हैं,                                       प्िानाचाया्म, दशक्षा दवभाग


                      अब नजर न क ु ् आया है।









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